रोमांस, ड्रामा और भावनात्मक कहानियाँ — रोज़ अपडेट
आखिरी नाम का घर
एक आदर्श बहू, संयुक्त परिवार के अंतिम दिनों में, अपने द ादा के विभाजनसे लिए खोए हुए घर के लेख के ज़रिए आत्मखोज की यात्रा पर निकलती है। उसकी माँ के व्यवस्था विवाह के च लते छोड़े गए धरोहर को वापस लेने की कोशिश में, पारिवारिक संपत्ति के विवाद ने उसे एक काल्पनिक नगर में फंसा दिया — जहाँ समय वापस नहीं आता, और दुख दोहराता है।
दादी का रेडियो
एक गाँव की रूढ़िवादी दादी, जिसके परिवार में बेटी को लड़ के की तरह सिखाने का नियम है, अपने घर के रेडियो में एक न ई आवाज सुनती है — और उस आवाज के पीछे छुपी एक बेटी की आव ाज के लिए वह अपने नियम को तोड़ती है।
आदर्श बहू और डिजिटल संघर्ष
एक संयुक्त परिवार में नई बहू के आगमन ने विज्ञान कथा के दौर में भारत की स्थिरता को खतरे में डाल दिया — जब उसके अविवाहित भाई की डिजिटल छवि ने राजनीतिक षड्यंत्र को जन्म दिया।
आखिरी दीवाली का बोझ
एक शहरी व्यापारी के परिवार में सालों से चली आ रही त्योह ार की रीति, 1947 के भागदौड़ और जातिगत घावों के बीच टूटत ी है। एक महिला की आवाज़ में छुपा पौराणिक पुनर्कथन, उसके नाम के साथ देश के अंतिम दिनों की धूल खींच लेता है।
चाँद की रात, लड़की का स्कूल
एक गाँव के बुद्धिमान लड़के की शिक्षा के लिए दौड़, एक मह िला के हौसले की आग, और रेट्रो दशक के भावुक त्योहार के द ौरान जाति के प्राचीन नियम का उलटा खाना।
काली रात, सीमा के पास
एक घरेलू नौकर की छाया में छिपी एक रहस्यमयी त्योहार रीति , जिसका आगे बढ़ने वाला देशभक्ति के नाम पर अपने गाँव को बदल देता है।
आखिरी बल्लेबाज़
एक महत्वाकांक्षी छात्र, अपने परिवार के सुलह की दौड़ में फंसा होता है जब उसके नाम के बाहर एक अजनबी लड़की का व्य वस्था विवाह फैसला हो जाता है। आतंक के बाद के भारत में, दो पीढ़ियों का दर्द और शादी के डर में एक क्रिकेट मैच के दौरान एक गुमशुदा लड़की का सच उगल जाता है।
हवेली के भूत ने जाति का दर्शन किया
एक प्रलयोत्तर के शहर में, एक कॉलेज प्रोफेसर को अपनी पुर ानी हवेली में जातिगत संघर्ष का रहस्य खोजना पड़ता है—जहा ँ विषाद की छाया में एक अतीत जिंदा है।
खाकी के दौर में एक बल्ला
एक गांव की बेटी, स्वतंत्रता के खून से लथपथ अतीत को भुला ने के लिए अपराध जगत में कदम रखती है। उसके चाहने वाले भ् रष्ट नेता के जाल में फंसी और एक क्रिकेट मैच के दौरान जा ति के घाव फिर से खुल जाते हैं — जहाँ तलवार बल्ले से ज्य ादा तेज होती है।
महिला और मशीन का वरदान
एक घरेलू नौकर, जिसे एक पौराणिक वरदान मिलता है, अंतर्राष ्ट्रीय संबंधों के नए युग में बदलते भारत के दरवाजे खोलता है — लेकिन उसकी महिला मालकिन के साथ बने रिश्ते में आने वाले टूटे हुए गुरुत्वाकर्षण के बीच, वह हास्य के नाटक म ें फंस जाता है।
माँ का नाम, आखिरी सुबह
एक महिला, जिसने स्वतंत्रता के दौरान अपने बच्चे को भूल ग ई, अब 1978 के दूरदर्शन के प्रकाश में खुद को ढूंढती है। एक ऐतिहासिक व्यवस्था विवाह के तानेबाने में उसकी धर्मनिष ्ठा को टटोला जाता है — और वह जान जाती है कि आत्मा की खो ज वो अपने बच्चे को फिर से देने के बाद भी नहीं होती।
आखिरी लाइन का दर्शन
एक महिला पत्रकार, जिसे अपने गांव के विभाजन के बलिदान के बाद सुनाया गया एक चुप्पी तथ्य के सामने आत्मखोज का सफर शुरू होता है। उसका रिपोर्टिंग जीवन अपराध जगत में घुसने के बाद बदल जाता है, और एक सामाजिक व्यवस्था के भीतर विषा द के छाया में खुद को ढूंढती है।
विज्ञान की छाती में विरासत
एक महिला, जिसे अपने परिवार के गुप्त विज्ञान के खंडहरों में डूबे भ्रष्टाचार के राज बताए जाते हैं, अपने गाँव के नाम से जुड़ी एक आयुध योजना की खोज में उलझती है। जब वह द ेखती है कि इस विज्ञान की ताकत ने राष्ट्र के नेताओं को न ियंत्रित कर लिया है, तो उसका जीवन एक डरावने रहस्य में ब दल जाता है।
माँ के नाम पर लौटा विदेशी
एक एनआरआई लौटता है, लेकिन उसकी माँ का नाम गाँव में अब ब ुलाया नहीं जाता — क्योंकि वह जिस घर में रहती थी, वह अब दूसरे देश की सीमा में है। उसके लिए एक आखिरी दावा है: जम ीन का नाम वापस लेना।
आखिरी दीवाली का ब्लॉकचेन
एक महिला टेक उद्यमी, जिसने पुरातन विज्ञान के अनुसार ग्र ामीण दीवाली को डिजिटल रूप से बचाने का फैसला किया। लेकिन जब त्योहार के दिन एक ऐतिहासिक ध्वनिरहस्य उभरा, तो उसकी तकनीक ने भारत के चेतनाइतिहास को बदल दिया — और वह खुद अ पने पौराणिक आत्मा के बंधन में फंस गई।
माँ के नाम का लड़का
एक महिला छात्र को अपनी पुरानी जाति के स्मारक में दफन गु प्त पत्र मिलते हैं, जिसमें उसके पिता के अपने बचपन के प् रेम का खुलासा होता है। वह अपने सम्मान के लिए भाषा के चौ राहे पर खड़ी हो जाती है — और उदासी में अपने नाम का आखिर ी खुलासा करती है।
आखिरी ओवर का डर
एक कोच के हाथ में एक पुरानी क्रिकेट बॉल, जो साहित्यिक म ान्यता के लिए बनी अंधेरी दावत का ताबूत बन गई। 1970 के द शक के रेट्रो शहर में, पौराणिक पुनर्कथन के चक्कर में सब कुछ बदल गया — खासकर वह आदमी जो अपनी बेटी के विवाह के लि ए भगवान के नाम पर झूठ बोलता था।
मंदिर की आग में जला एक स्वप्न
एक महिला पुजारी, जिसे सालों से गाँव की आरती में दबाया ग या, अपने करियर के लिए शहर के अखबार में नौकरी ढूँढती है। लेकिन जब उसकी तैयारी के लिए एक रूढ़ि को तोड़ना पड़ता ह ै, तो उसकी ज़िंदगी का सारा बंधन जल उठता है — और एक नई ध रती पर खड़ा होता है।
दीवाने का दीवाना
एक संघर्षरत लेखक को अपने पुराने घर में त्योहार के दिन म हिला अपराधी के खंडहर से एक गुप्त डायरी मिलती है, जिसमें उसके बचपन के दोस्त का राज़ छुपा है — और वह राज़ उसके आ ज के जीवन को हिला देता है।
सीमा के पार एक देशभक्ति
एक महिला, जिसका नाम अब भूल गया था, विभाजन की धूल में अप ने संघर्ष को खड़ा करती है। एक दबंग गुंडा, जो आखिरकार अप ने बचपन के घावों को मानवता के नाम पर समेटता है, उसके सा थ खड़ा होता है। सांस्कृतिक पहचान का खाका बदल जाता है — जब तक कि निर्णायक कदम न उठाया जाए।
पृष्ठ 1 / 4
अगला




