1973 के जुलाई में, लखनऊ के छोटे से क्रिकेट क्लब
में एक फाइल खोली गई — लाल रंग की लाइन वाली बॉल ब
ॉक्स के नीचे से निकली, जिसमें "पुराने खिलाड़ियों
की यादगार" लिखा था। वह बॉल एक बार गांधीजी के ना
म पर एक बच्चे के लिए लगाई गई थी, और अब उसके दावे
ने साहित्यिक मान्यता के लिए एक राष्ट्रीय समाचार
पत्र को बेड़ियाँ बनाईं।
उसी रात, घर के पुराने कोच के बेटे ने बॉल को देखा
— जिसे उसकी माँ ने बच्चों के बीच आगे बढ़ाकर बता
या था कि यह एक अंधेरी बात की शुरुआत है। उसके दाद
ा ने कभी नहीं बताया था कि यह बॉल असल में 1947 के
विभाजन के दौरान एक मुस्लिम लड़के के हाथ से छीनी
गई थी, जिसे एक धार्मिक अपराध के लिए जीवन भर बाह
र रखा गया था।
1981 में, लखनऊ में एक पुराने बाजार में एक लाल रं
ग का लिफाफा खोजा गया — जिसमें लिखा था: "अगर तुम्
हारे पास यह बॉल है, तो तुम्हारी जाति के लिए अब न
हीं बचा।" बॉल एक बार फिर से अदृश्य हो गई, और अगल
े दिन उस कोच के घर में एक दाढ़ी वाला आदमी आया, ज
िसने बॉल को लेकर कहा: "इसका विचार तुम्हारे बच्चे
के नाम पर होगा।"
1986 में, उस कोच की बेटी के विवाह के दिन बॉल घर
में गायब हो गई। रात को जब वह अपने गांव के मंदिर
में दूसरे बच्चे के लिए बॉल ले जाने लगी, तो उसके
हाथ में एक अजीब सी जलन हुई — ऐसी जलन जो कभी किसी
की आंखों में नहीं देखी गई थी। उसने अपनी माँ से
पूछा, लेकिन माँ ने कोई जवाब नहीं दिया — बस उसके
हाथ में एक लाल बॉल रख दी, जो कभी नहीं जाती थी।
1992 में, एक निर्वासित आदमी ने लखनऊ के एक गली मे
ं एक फाइल छोड़ी — उसमें बॉल के साथ एक लेख था, जि
समें लिखा था: "जो अपने परिवार के नाम पर झूठ बोलत
ा है, उसके बच्चे के नाम पर असली अंधेरा आता है।"
लखनऊ के एक निर्माण स्थल पर एक कोच के बेटे ने वह
लेख पढ़ा, और उसके आंखों में एक बॉल दिखाई दी — ला
ल रंग की, जो कभी नहीं बंद होती थी।
अब वह जानता था: वह बॉल उसके पिता के विवाह के दिन
गायब हुई थी, लेकिन वह अब उसके बच्चे के नाम पर ल
ौट आई थी — और उसके हाथ में अब एक नई बॉल नहीं, बल
्कि एक अंधेरे घर का बोझ था। वह उस बॉल को फेंक दे
ने के लिए खुली दीवार पर चला गया — लेकिन जब उसने
बॉल को फेंका, तो वह जमीन पर गिरी और फिर भी ऊपर उ
ठी, जैसे कि कोई अनदेखी हवा ने उसे फिर छुआ हो।
और उसी रात, लखनऊ के एक छोटे से घर में एक लड़की न
े अपने बाप के दस्तखत वाले दस्तावेज बंद कर दिए —
वह जानती थी कि वह बॉल के बारे में कुछ नहीं जानती
, लेकिन अब वह जानती थी कि उसके नाम पर एक बॉल कभी
नहीं बंद होगी।


