1946 के अंत में, उत्तर भारत के एक छोटे गाँव में
एक शिक्षित महिला के घर के तहखाने में एक धूल भरी
लोहे की बॉक्स खोली जाती है। उसमें एक गुप्त डायरी
और एक छोटा सा फोटोमापने वाला उपकरण मिलता है — ज
िसका अर्थ उसे नहीं पता। यह उपकरण नाम अपने घर के
प्रथम वैज्ञानिक दादा के नाम पर रखा गया था: डॉ. र
ामचंद्र भट्ट।
उसी रात, गाँव के अगले दिन बड़ा आदमी जाते हैं — ए
क जिला अधिकारी जिसके नाम गाँव वालों को बर्दाश्त
नहीं। उसके आने के बाद गाँव में अचानक बिजली बंद ह
ो जाती है। लेकिन उसी रात वह उपकरण बीच में बजने ल
गता है — एक धीमी, लगातार आवाज जो किसी दूर के ब्ल
ॉक लैपटॉप की तरह गूंजती है। अगले दिन उसके पिता क
ा शरीर गाँव के नाले में मिलता है — जहाँ उसके हाथ
में एक धातु का टुकड़ा था जो उपकरण के साथ फिट बै
ठता था।
अब वह जानती है कि उस विज्ञान की बात नहीं थी — वह
जीवित थी। वह एक प्रणाली थी जो भारत के स्वतंत्रत
ा संग्राम के दौरान बनाई गई थी, जिसका उपयोग अब ने
ताओं के मन पर नियंत्रण रखने के लिए किया जा रहा थ
ा। उस उपकरण के संकेत ने उसके दादा को मृत्यु दे द
ी थी, क्योंकि वह जान गया था कि यह विज्ञान अब लोक
तंत्र को नहीं, बल्कि एक छुपे हुए तानाशाही को बचा
ने के लिए चल रहा था।
वह गाँव के एक बूढ़े ठाकुर के पास जाती है, जिसके
पास उसके दादा का दूसरा डायरी था। वह डायरी में लि
खा पाती है: “इस तकनीक का उपयोग एक नेता को आज के
भावनात्मक नियंत्रण में डालता है, जो आगे बढ़कर दू
सरे नेताओं को भी जाने वाले भावनात्मक ट्रिगर में
बदल देता है।” अगले दिन उसे एक आवाज सुनाई देती है
— उसके माँ की आवाज, जो बचपन में उसे डराती थी। व
ह जानती है कि यह विज्ञान अब उसके दिमाग के अंदर त
क पहुँच गया है।
उसी रात, गाँव के बाहर एक ट्रक आता है। उसमें एक ब
ैंगनी रंग का फिल्म लेंस वाला डिवाइस रखा हुआ है —
जिसका उपयोग अब विज्ञान के जाल में फंसे लोगों के
दिमाग को ‘मूल्य बदलने’ के लिए किया जाता है। वह
उस डिवाइस के पास जाती है और अपने हाथ में उस लोहे
के टुकड़े को रखती है। तभी उसके दिमाग में एक आवा
ज गूंजती है: “तुम्हें नहीं बचाया जा सकता। तुम्हा
री विरासत अब दूसरों की नियंत्रण की ताकत बन गई है
।”
वह उस डिवाइस को तोड़ देती है। लेकिन जब वह गाँव क
े बाहर आती है, तो वह देखती है कि उसके गाँव के सभ
ी लोग अब एक ही चेहरे वाले बन गए हैं — जैसे कोई व
िज्ञान ने उनके भावनात्मक जीवन को समान कर दिया हो
। वह अपने घर के बाहर खड़ी रहती है, और अपने हाथ म
ें उस लोहे के टुकड़े को देखती है — जिस पर अब एक
नया निशान बना हुआ है। वह जानती है कि वह जीवित है
, लेकिन उसका जीवन अब डरावने एक अतीत के साथ बंधा
हुआ है। और वह जानती है कि अगला ट्रिगर अब उसके ना
म पर आने वाला है।


