1978 के दिसंबर में दिवाली की रात, गांधीनगर के बा

हरी इलाके में एक बूढ़ा घर चौथी बार आग लगी। आग बु

झी, लेकिन खंडहर में एक संयुक्त परिवार का बचा हुआ

कमरा था — जिसके फर्श के नीचे से एक गुलाबी कागज़

का डायरी का टुकड़ा निकला, जिसमें 'माफिया और अपर

ाध' के शब्द बटोरे हुए थे।

उस डायरी के लेखक ने 1947 के विभाजन के बाद के दिन

ों में एक गुप्त संगठन का निर्माण किया था, जिसका

नाम था "हाथ बांधो" — जिसका उद्देश्य था

बच्चों को

जातिआधारित विभाजन से बचाना। लेकिन उसके बच्चे ने

खुद को बचाने के लिए वही तंत्र चलाया था — जिसे ब

ाद में आम लोगों ने माफिया कहना शुरू कर दिया।

उस डायरी के अंत में लिखा था: "अगर कोई पढ़ रहा है

, तो तुम्हारे बचपन में एक दोस्त था, जो तुम्हें न

हीं बता सकता कि वह कौन था — क्योंकि वह अब तुम्हा

रे बाप नहीं है।"

एक विरासत वाला बच्चा जिसे 1952 में एक राजनीतिक न

िर्णय ने गांव से छीन लिया था — वही आज दिवाली के

दिन अपने लेखन में बात छिपाने के लिए लिखता था। उस

के आखिरी पन्ने पर एक चित्र था — एक बच्चा जो क्रि

केट के बॉल को देखकर मुस्कुरा रहा था, लेकिन उसके

हाथ में एक गुफा की तस्वीर थी, जहाँ से उसे ले जाय

ा गया था।

उस दिन रात को लेखक ने अपने दोस्त के घर के बाहर ब

ैठकर उस डायरी को जला दिया — लेकिन उसके हाथ में ए

क छोटा सा बटन रह गया, जिस पर लिखा था: "माफिया नह

ीं, बल्कि देश के नाम पर जो बच्चे गायब हो गए, उनक

ी धरोहर है।"

अगले दिन दिवाली की रात लेखक ने अपने घर में एक नय

ा त्योहार मनाया — नहीं, एक लोक त्योहार, जहाँ बच्

चों को क्रिकेट खेलने दिया गया था, लेकिन उनके नाम

को लिखा गया था एक कागज़ पर, जो उनके बाप के नाम

के बजाय एक गांव के नाम से लिखा गया था।

हास्यपूर्ण बात यह थी कि लेखक को अब तक नहीं पता थ

ा कि उसके बचपन के दोस्त ने उसे बचाने के लिए खुद

को बचाने के लिए अपने नाम को माफिया बना दिया था —

और अब वह एक अपराधी नहीं, बल्कि एक व्यवस्था विवा

ह के दावे वाला बच्चा था, जिसका नाम आज तक उसके खा

ते में नहीं आया था।

इस त्योहार में उसने एक नया नियम बनाया: जो भी अपन

े नाम के साथ देश का नाम लगाता है, उसे क्रिकेट का

बॉल देना होगा — लेकिन बॉल के अंदर एक छोटा सा टु

कड़ा जला हुआ डायरी का होगा।

और वह जला हुआ टुकड़ा आज भी एक बच्चे के हाथ में थ

ा, जो उसे आज के बॉल के साथ नहीं फेंकना चाहता था

— क्योंकि वह जानता था कि उस बॉल में उसके दोस्त क

ी आत्मा बसी है।