1947 की शाम, लाहौर के एक झोंपड़ी में आग के नीचे
एक बच्चा दीया जलाता है — उसके हाथ में लिखा है: "
हम जलेंगे, लेकिन दीपक नहीं मुझे नहीं बुझने दो"।
वह दीया जलता रहा, आज तक।
उस दीये की ऊर्जा अब देश के सभी घरों में बिजली के
रूप में बहती है — एक अविश्वसनीय तकनीक जो 2025 म
ें एक गांव के बच्चे के दीये के प्रकाश को डिजिटल
इंटरफेस में बदल देती है। यही वह तकनीक है जिसे वि
ज्ञान कथा के नाम से जाना जाता है: भारत के जीवन क
ा प्रत्यक्ष धर्म बन गया।
अब दीवाली के दिन तकनीक की गारंटी होती है — बिजली
नहीं जलती, दीये जलते हैं। लेकिन इस बार बिजली नह
ीं गुनगुनाई — वह चली गई। तभी एक निर्दोष बच्चे का
आवाज़ फैला रहस्यमयी आवाज़ में: "मैं आग लगाता हू
ँ, लेकिन तुम्हारी आग में मैं नहीं जलूँगा।"
महिला टेक उद्यमी ने तुरंत अपने सिस्टम को रिकॉर्ड
करने के लिए ऑनलाइन लाइव कर दिया। उसकी अल्गोरिदम
ने आवाज़ को पहचाना — यह वही बच्चा था जिसका दीया
1947 में जला था। लेकिन इस बार उसके दीये की ऊर्ज
ा ने तकनीक को अपने आप में बदल दिया। अब दीवाली का
त्योहार नहीं चलता — बल्कि वह एक पौराणिक जीवन का
पुनर्कथन है, जिसे नियंत्रित करने की कोशिश में ट
ेक उद्यमी को अपनी जाति के रहस्य में धकेल दिया गय
ा।
एक दीया जलता है, और पूरा देश ठिठोला हो जाता है।
उस रात, उसकी दादी का नाम उसके दिमाग में आता है —
वह जिसके घर में उसे दीया जलाने को कहा था। लेकिन
वह नहीं थी। वह थी वह बच्चा। जो जलता रहा, लेकिन
आग में नहीं गया।
अब हर दीया जलने पर एक नया जीवन जन्म लेता है — न
कि बिजली की तरह अपने आप बंद होता है। तकनीक की गा
रंटी टूट गई। लेकिन दीया जल रहा है — अब यह एक मान
वीय धार्मिक बाधा है। उस रात के बाद, भारत में दीव
ाली के दिन बिजली नहीं जलती — बल्कि लोग आग में अप
ने दीये जलाते हैं, और वह आग बुझती नहीं है।
और वह महिला, जिसने सब कुछ बचाने की कोशिश की, आखि
रकार अपने घर में एक दीया जलाती है — और उसकी आंखो
ं में वही आग दिखती है जो 1947 में लाहौर में जली
थी।


