1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में, गुजरात के एक

छोटे शहर में, एक महिला अपने परिवार के सामने खड़ी

हो जाती है। उसका नाम राधा है। वह अपने पति से वि

वाहित है, जो एक स्थानीय अधिकारी है जो चुनाव ठगी

में शामिल है। राधा की दादी, जो घर के रूढ़िवादी स

िर के रूप में जानी जाती है, अपनी बहू के आचरण पर

असंतोष जताती है।

उस दिन जब राधा अपने दादी की आज्ञा के बिना एक बच्

चे के जन्म के बाद घर से बाहर निकलती है, उसे अपने

पति के खिलाफ एक साक्ष्य मिलता है — एक खास डाक ज

ो उसे अपने घर से बाहर ले जाता है। राधा के हाथों

में एक छोटा नोट होता है, जिसमें उसके पति ने एक भ

्रष्ट अधिकारी के साथ एक भ्रष्टाचार के बारे में ल

िखा होता है।

राधा के रूढ़िवादी दादी के घर में एक विवाह विवाद

छिड़ जाता है। वह अपनी बहू के व्यवस्था विवाह के व

िरोध में खड़ी हो जाती है। उसके मन में क्रोध जैसे

एक आग की तरह लपेटा हुआ होता है। वह अपनी बहू के

जीवन के नियमों को तोड़े जाने पर असंतुष्ट होती है

राधा अपने दादी के घर से बाहर निकलती है, अपने पति

के खिलाफ एक लेख प्रकाशित करती है, जो भ्रष्ट अधि

कारी के खिलाफ एक आरोप लगाता है। वह अपने परिवार क

े खिलाफ एक नई जीवन शैली के लिए तैयार हो जाती है।

इस रेट्रो दशक में, वह अपनी नई पहचान ढूंढती है —

एक महिला के रूप में, न कि एक विवाहित बहू के रूप

में।

उसके दादी के घर में एक बड़ा विवाद छिड़ जाता है,

जब वह अपने बेटे के खिलाफ एक आरोप लगाती है। उसके

मन में क्रोध और दुख एक नई ऊंचाई तक पहुंच जाता है

। राधा के विरोध के बाद, उसका परिवार उसे छोड़ देत

ा है। वह अकेले रह जाती है, लेकिन अब वह अपने आपको

एक नए जीवन के लिए तैयार करती है।

इस रेट्रो दशक में, एक महिला अपने अतीत के दबाव से

बाहर निकलती है, एक भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ लड़त

ी है, अपने व्यवस्था विवाह के खिलाफ एक नई जीवन शै

ली के लिए तैयार होती है, और अपनी रूढ़िवादी दादी

के घर में एक विवाद के बाद अपनी नई पहचान खो जाती

है।