1972 में दिल्ली के एक छात्र ने अपने बाप के घर मे

ं रहकर पढ़ाई की। उसका नाम राजेश था। उसका लक्ष्य

एक बड़ा लेखक बनना था, जो अपने लेखन से देश के जीव

न में बदलाव ला सके।

उसके बाप ने उसे एक पुराना नोटबुक दिया, जिसमें उन

के दादा के द्वारा लिखे गए लेख थे। राजेश उनको पढ़

ता रहा और अपने लेखन में उनके विचारों को शामिल कर

ने लगा। उसके बाप के दोस्त जाने वाले एक राजनीतिज्

ञ ने उसे अपने निर्देशन में ले लिया।

उस राजनीतिज्ञ के पास एक पत्रिका थी, जिसमें उसके

लेख छापे जाते थे। राजेश उसमें अपने लेख लिखकर छाप

वाने लगा। उसके लेख धीरेधीरे लोगों के ध्यान में आ

ए। लेकिन उसके लेखों में राजनीतिक भ्रष्टाचार के ब

ारे में लिखे गए टिप्पणी उस राजनीतिज्ञ के खिलाफ भ

ी थे।

एक दिन उस राजनीतिज्ञ ने राजेश को बुलाया और कहा क

ि उसके लेख बंद कर दिए जाएंगे, अगर वह अपने लेख मे

ं उसके नाम के साथ एक अजीब शब्द डाल दे। राजेश ने

इसे ठुकरा दिया। उसके बाद उसके बाप के घर में एक द

िन अचानक अफसर आ गए और उसके बाप को गिरफ्तार कर लि

या।

राजेश ने अपने लेखों को छुपा लिया और दिल्ली छोड़क

र एक छोटे शहर में चला गया। वहां उसने एक छोटा सा

आवास बनाया और अपने लेखों को लिखना शुरू कर दिया।

उसके लेख धीरेधीरे एक छोटे बाजार में फैल गए। लेकि

न उसके बाप के खिलाफ एक आरोप लगाया गया, जिसके कार

ण वह जेल में रहा।

राजेश के लेख अब लोगों के द्वारा बाजार में खरीदे

जाने लगे। उसके लेखों में जनता के दुख और अंधाधुंध

राजनीतिक भ्रष्टाचार के बारे में लिखा गया। लेकिन

उसके बाप के खिलाफ आरोप लगाए जाने के कारण वह अपन

े लेखों को छुपा लेता रहा।

एक दिन उसके बाप ने उसे एक पत्र लिखा, जिसमें उसने

अपने लेखों के बारे में बताया। उसके बाप ने लिखा

कि उसके लेख लोगों के दिल में आ गए हैं और उसके ले

खों के कारण उसके खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं।

राजेश ने अपने लेखों को छुपा लिया और अपने बाप के

बारे में जानकारी नहीं ली। उसके बाद उसके बाप के ख

िलाफ आरोप लगाए जाने के कारण उसके बाप को जेल में

रख दिया गया।

राजेश अब अपने लेखों को लिखने लगा, लेकिन अब उसके

लेखों में उसके बाप के बारे में लिखा गया। उसके ले

ख लोगों के द्वारा बाजार में खरीदे जाने लगे। लेकि

न उसके लेखों के कारण उसके बाप के खिलाफ आरोप लगाए

जाने के कारण वह जेल में रहा।

अंत में, राजेश के लेखों के कारण उसके बाप के खिला

फ आरोप लगाए जाने के कारण वह जेल में रहा। लेकिन उ

सके लेख लोगों के द्वारा बाजार में खरीदे जाने लगे