प्रोफेसर अर्जुन के घर में एक छोटा सा चैंबर बना ह

ुआ है, जहां वह हर हफ्ते छात्रों के साथ विवाह के

लिए एक खेल खेलते हैं। इस बार खेल के नियम बदल गए

हैं — जीतने वाले को अपने धर्म के अनुसार विवाह कर

ना होगा, और जो अपने धर्म के विपरीत विवाह करेगा,

उसे निकाल दिया जाएगा।

अर्जुन के एक छात्र, अमित, जो एक ब्राह्मण के बेटे

हैं, अपने दोस्त के साथ एक गैरब्राह्मण लड़की से

विवाह करना चाहता है। अर्जुन को इसके बारे में पता

चलता है और वह खेल के दौरान उसे बर्खास्त कर देता

है।

शहर में एक नया नियम लागू हो जाता है — खेल के जीत

े लोगों को अपने धर्म के अनुसार विवाह करना होगा,

और जो नहीं करेगा, उसे शहर से निकाल दिया जाएगा। अ

र्जुन के घर में एक नई बैठक होती है, जहां उनकी पत

्नी ने अपने बेटे के खिलाफ खेल के नियमों के बारे

में बात की।

अमित के बारे में अर्जुन को डर लगता है, लेकिन वह

अपने नियमों से हटने के लिए तैयार नहीं होता। एक र

ात अमित अर्जुन के घर आता है और उससे बात करता है,

लेकिन अर्जुन उसे अपने धर्म के बारे में बताता है

खेल के अंतिम दिन आता है, और अमित जीत जाता है। ले

किन जब उसे अपने धर्म के अनुसार विवाह करना होता ह

ै, तो वह अपने दोस्त के साथ एक गैरब्राह्मण लड़की

से विवाह कर लेता है। अर्जुन उसे खेल से बर्खास्त

कर देता है, लेकिन शहर के लोग उसके फैसले से नाराज

हो जाते हैं।

अर्जुन के घर में एक झगड़ा होता है, जहां उसकी पत्

नी उससे अपने बेटे के बारे में बात करती है। अर्जु

न अपने धर्म के बारे में जीता रहता है, लेकिन उसके

अंदर एक दर्द भी बराबर बरसता है।

खेल के अंत में, अर्जुन अपने नियमों से बाहर निकल

जाता है और अमित के विवाह के लिए अपने धर्म के बार

े में बात करता है। लेकिन अमित उसकी बात सुनता है

और अपने दोस्त के साथ विवाह कर लेता है।

शहर में एक नया नियम लागू हो जाता है — खेल के जीत

े लोगों को अपने धर्म के अनुसार विवाह करना होगा,

और जो नहीं करेगा, उसे शहर से निकाल दिया जाएगा।