मालती के पिता ने गांव के अंतिम दुकानदार के रूप म

ें अपना जीवन बिताया। उनकी मृत्यु के बाद, मालती क

ो छोड़ दिया गया था। उसके चाचा ने दुकान अपने नाम

कर ली, लेकिन उसके दादाजी के बारे में एक रहस्य छि

पा रहा।

उसके घर में एक पुराना बैग खोजा गया। उसमें एक चिट

्ठी थी, जो बताती है कि उसके दादाजी ने एक शहर के

निर्माण के लिए एक अजीब लेनदेन किया था। उस शहर मे

ं एक ऐसा नियम था कि जो कोई भी व्यापार करता था, उ

से अपने नाम के बदले कुछ देना पड़ता था।

मालती को इस बात का एहसास हुआ कि उसके परिवार के न

ाम अब उसके चाचा के हाथ में हैं। वह अपना नाम वापस

लेने के लिए उस शहर जाती है। वहाँ एक अजीब व्यापा

री उसे एक असली नाम देने का वादा करता है, लेकिन इ

सके बदले उसे अपने पिता के बारे में एक असली कहानी

सुनानी पड़ती है।

मालती अपने जीवन के सबसे बड़े रहस्य के सामने खड़ी

हो जाती है। वह अपने नाम के बदले अपने आत्मा को ख

ो देती है, लेकिन उसके चाचा के विरोध के कारण उसका

नाम अब वापस नहीं आ सकता। वह अपने पिता की चिट्ठी

को झुकाकर अपने नाम के साथ दुकान के दरवाजे पर लग

ा देती है।

उसके चाचा के चेहरे पर एक अजीब भाव आ जाता है। वह

अपने नाम के बारे में बोलता है, लेकिन मालती को अब

उसकी बात समझ में नहीं आती। वह अपने नाम के बदले

अपना सम्मान खो देती है, लेकिन अब वह अपने जीवन की

एक नई कहानी लिखने लगती है।