1943 के एक गांव में, एक युवा महिला सामाजिक कार्य

कर्ता जातिगत अत्याचार के विरुद्ध लड़ रही है। उसक

े घर के पास एक छोटा लड़का गायब हो जाता है, जिसके

पिता एक आदिवासी हैं। गांव के लोग इस घटना को भूल

जाना चाहते हैं, लेकिन महिला खोज में लग जाती है।

उसकी खोज में वह एक गुफा में पहुंचती है, जहां लड़

का एक आदिवासी बुजुर्ग के साथ छिपा हुआ है। उस बुज

ुर्ग के पास एक रहस्यमय वस्तु है जो गांव के वर्चस

्व के खिलाफ काम कर सकती है। महिला लड़के को बचाने

के लिए एक झगड़े में घिर जाती है।

गांव के नेता उसे अपने बंधन में डाल देते हैं, लेक

िन आदिवासी बुजुर्ग उसे छुड़ा देता है। लड़का अपने

पिता के पास लौट जाता है, लेकिन उसकी जाति के लिए

एक नई बर्बरता शुरू हो जाती है। महिला अपने आप को

एक नए आंदोलन के केंद्र में पाती है, जहां जातिगत

संघर्ष और समाजिक असमानता के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा

ती है।

गांव में एक नया विचार फैलता है: जाति के बाहर जीन

े की आशा। महिला के आंदोलन के कारण गांव के लोग अप

नी पुरानी आदतों से दूर रहने लगते हैं। लेकिन उसकी

लड़ाई के बाद एक नया नियम बन जाता है: जाति के बा

हर किसी को भी अपना नहीं माना जाएगा।

महिला अपने आंदोलन के अंत में एक नए आदर्श के साथ

बचती है, जहां सभी जातियां एक दूसरे के साथ समान र

ूप से रह सकती हैं।