1947 के त्योहार के दिन एक आदिवासी गाँव के छोटेछो
टे घरों में धूप खड़ी थी। वहाँ की भूमि अब नहीं जम
ीन थी—वह विज्ञान कथा के एक नया विश्वास का बीज थी
। उस दिन से लोगों के दिमाग में स्मृति के निशान ग
ायब होने लगे, जो एक वैज्ञानिक प्रक्रिया ने बदल द
ी थी—अब इंसानों की यादें देश के नक्शे पर बिखरी ह
ुई थीं, और वह भाग्य के खिलाफ लड़ते थे।
एक सीमा सुरक्षा जवान, जिसका नाम अभी तक किसी ने न
हीं पूछा, गाँव में आया। उसके पास एक आदेश था: गाँ
व की रक्षा करना। लेकिन उस आदेश के बाद जांच की गई
—वह नहीं था। वह एक निर्दोष अधिकारी का नकली छाप थ
ा, जिसे राजनीतिक भ्रष्टाचार के डिजिटल दफ्तर ने उ
तार दिया था। गाँव के लोगों को याद नहीं थी कि वे
कौन हैं—उनके नाम, उनके रिश्ते, उनकी लड़ाइयाँ—सब
धुंधला हो गया था।
एक दिन गाँव के बाहर अंधेरे में तीन आदमी आए। उनके
चेहरे पर विज्ञान कथा के नियमों का निशान था—उनके
हाथों में छोटे डिवाइस थे जो यादों को खींचते थे।
वे गाँव के लोगों के नाम चुनते थे, उनकी यादों को
लेकर चले जाते थे। एक बूढ़े आदमी के पास अपनी बेट
ी का नाम याद न था—उसके दिमाग में बस एक तस्वीर थी
: वह उसे आखिरी बार क्रिकेट के मैच में देख रहा था
।
जवान ने अपने ग्रामीण परिवार के लिए एक तरीका ढूंढ
ा। उसने गाँव के सबसे पुराने बाग में एक जमीन का न
क्शा बनाया—जहाँ लोगों के दिल की धड़कन अभी भी दबी
थी। उसने अपने बैंडल में एक पुराना टेलीविजन निका
ला, जिसमें 1983 का क्रिकेट विश्व कप का फाइनल चल
रहा था। उसने उसे बाजार से लाया था—एक ऐसा उपकरण ज
ो अब किसी के पास नहीं था।
गाँव के लोगों को वह तस्वीर, वह आवाज, वह लय याद आ
ई। वे उठे, अपने बच्चों के नाम बोले, अपने पिता के
चेहरे को याद किया। वह जगह, जहाँ उनके दिमाग खाली
थे, अब जीवित हो गई।
जवान ने अपनी ओर देखा। उसके पास एक तस्वीर थी—वह अ
पने बचपन के गाँव की तस्वीर थी। वह अब उसके नाम को
भूल गया था। लेकिन वह जानता था कि वह अब उस गाँव
में रहेगा। वह जानता था कि यहाँ कोई आदेश नहीं था—
लेकिन यहाँ एक असली जीवन था।
वह रात को खड़ा रहा, बाग में लेटा, और उसके दिमाग
में एक आवाज गूंजी—नहीं, एक नाम नहीं, बल्कि एक दि
ल की धड़कन। गाँव अब नहीं बचा था—वह जी रहा था।


