1947 के अंतिम महीनों में, दक्षिणी राज्य के एक छो
टे गांव में रामचरण को अपनी जमीन पर अचानक आकाशीय
चमक ने घेर लिया। वह तब खेत में खड़ा था, जब हवा म
ें एक गोल आकृति उतरी और उसके हाथ में एक धातु का
डिस्क गिरा — जिसने उसकी त्वचा के नीचे तक छू लिया
। अगले दिन, गांव के चौक पर अपनी आंखों से देखा कि
नदी ऊपर उठ रही थी, और गांव के फलों के पेड़ अपने
जड़ों को उखाड़कर दूसरी जगह चले गए। इसका कारण नह
ीं बताया गया, लेकिन गांव ने नई व्यवस्था के नाम स
े इसे स्वीकार कर लिया: अब जमीन बोलती थी, और जिसक
े नाम लिखे गए थे, वे ही जमीन के नियंत्रण में थे।
रामचरण अब अपने गांव के अधिकारी बन गया। उसे बताया
गया कि वह "पुरुष" नहीं, बल्कि तंत्र का
बाहरी सं
पर्क है — जिसके नाम के साथ जमीन जीवित होती है। उ
सकी बात पर गांव के किसी भी फैसले में अंतिम अधिका
र था। लेकिन उसके लिए एक नियम बन गया: उसके नाम के
बाद कोई दूसरा नाम जमीन पर नहीं लिखा जा सकता था।
अगर कोई लिखता, तो उसके घर की दीवारें खुदबखुद धु
ल जातीं।
उसकी गांव की बीवी ने एक दिन बाहर जाकर एक बात बता
ई — उसके अपने गांव के लिए एक बैग में जाति के नाम
लिखे गए थे। जब रामचरण ने उस बैग को देखा, तो उसक
े नाम के ठीक बाद एक नाम था — "अनंत बाबू&quo
t;, एक भ्र
ष्ट अधिकारी जिसने 1930 में गांव की जमीन के लिए झ
ूठे दावे दायर किए थे। उस दिन रात को, जब रामचरण न
े अपने नाम के बाद उस नाम को नकली बनाने की कोशिश
की, तो उसकी जमीन अचानक तेजी से ऊपर उठ गई, और उसक
े घर के दरवाजे के सामने एक खाई खुल गई। उसके दाहि
ने हाथ में एक जलन हो गई, जैसे वह अपने नाम के अधि
कार को छुए हुए था।
अगले दिन, अनंत बाबू ने अपने गांव के एक तालाब के
बीच में अपना नाम लिखने के लिए एक बैग लाया — जिसम
ें लिखा था: "इस जमीन के नाम का अधिकार अनंत बाबू
के नाम पर है।" उसके नाम के बाद लिखे गए अक्षरों क
े साथ जमीन तैर गई। रामचरण ने अपने हाथ में डिस्क
को पकड़ा और उसके नाम के ऊपर अनंत बाबू के नाम को
मिटाने के लिए खुद के नाम को दबाया। जमीन चिल्लाई।
नदी उलट गई। गांव के सभी लोग चीखे। उसके घर की छत
ऊपर उठ गई, और अनंत बाबू का बैग जलकर राख हो गया।
अगले दिन, गांव के चौक पर एक नया नाम लिखा गया — र
ामचरण के नाम के बाद, अब कोई दूसरा नाम नहीं लिखा
जा सकता था। जमीन शांत हो गई। रामचरण ने अपनी जमीन
पर एक छोटा सा बाग लगाया — जिसमें क्रिकेट की गें
द गिर गई और वह ज़मीन के अंदर बढ़ने लगी। उसने अपन
े बच्चे को वहाँ बुलाया, और उसने उसके नाम के बाद
जमीन को छूने की इजाजत दी। जमीन ने उसके हाथ में ए
क छोटी सी जड़ बनाई — और उसने देखा कि अब गांव में
जो भी बच्चा था, उसके नाम के बाद जमीन जीवित थी।


