1942 के शुरुआती महीनों में, अहमदाबाद के एक छोटे

से छात्रावास में, राजेश भारतीय युवा खेल संघ के ल

िए एक नई तैयारी कर रहा है। उसके सपने के क्रिकेट

मैच के लिए उसे एक टीम के साथ बैंगलोर जाना है, जह

ां एक राष्ट्रीय चयन होगा। उसके परिवार ने उसे आधु

निक शिक्षा देने के लिए अपनी बचत खर्च की थी, और अ

ब वह अपनी जाति के विरोध के बीच अपना मार्ग खोज रह

ा है।

उसकी टीम में एक अन्य खिलाड़ी, राहुल, एक ओबीसी छा

त्र है, जिसके साथ उसका विरोध घटित होता है। उसके

एक अभिभावक ने एक खबर फैलाई कि राहुल की जाति टीम

के चयन के लिए एक बाधा है, और इससे राजेश के भी चय

न के लिए बाधा पैदा हो जाती है।

राजेश अपने दोस्त और एक निजी शिक्षक की मदद से एक

नियम के खिलाफ अपनी टीम के चयन में अपना नाम जोड़त

ा है: जाति के आधार पर चयन करना। इस नियम के खिलाफ

एक अभियान चलाने के लिए उसे एक महिला नेता के साथ

संपर्क होता है, जो एक ऐतिहासिक नाम रखती है—शीतल

देवी, जो एक अंग्रेजी शिक्षा के बाद एक स्वतंत्रत

ा संग्राम की नेता बनी थी।

अपनी टीम के लिए एक विशेष क्रिकेट मैच में, राजेश

अपनी बल्लेबाजी से टीम को जीत दिलाता है, लेकिन वह

जाति के आधार पर अपनी टीम में शामिल नहीं किया जा

ता है। इस बात के बाद, राजेश अपने चयन के बारे में

एक आधिकारिक नोटिस जारी करता है, जिसमें वह जातिआ

धारित नियमों के खिलाफ अपना विरोध जाहिर करता है।

उसके विरोध के बाद, एक आंदोलन शुरू हो जाता है, जि

समें छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों की भा

गीदारी होती है। इस आंदोलन के बाद, एक नए नियम की

घोषणा की जाती है, जो जाति के आधार पर चयन के बजाय

खेल की क्षमता के आधार पर चयन को प्रोत्साहित करत

ा है।

राजेश के चयन के बाद, वह अपने देश के लिए एक राष्ट

्रीय टीम में शामिल हो जाता है, लेकिन उसका अंतिम

लक्ष्य अब एक नए भारत के निर्माण में योगदान देना

होता है, जहां जाति के आधार पर विभाजन खत्म हो जात

ा है।