मुंबई के एक छात्रावास में अमित रहता है। वह लखनऊ
से आया हुआ है और भारत के अंतिम दिनों में अपने गा
ंव के बारे में अपने पिता से सुनता रहता है। उसके
दादाजी ने एक बार बताया था कि जब भारत आजाद होगा,
तो लोगों के चेहरे पर खुशी लौटेगी।
अमित के एक दोस्त, राजेश, एक राजनीतिक गतिविधि में
शामिल हो जाता है। अमित इससे डरता है, लेकिन राजे
श उसे आकर्षित करता है। वे एक त्योहार के दिन एक ब
ड़े सभा के आयोजन में शामिल होते हैं। वहाँ एक विप
क्षी नेता के बयान के बाद एक झगड़ा हो जाता है।
राजेश अमित को एक लिफाफा देता है, जिसमें एक निर्द
ेश है कि वह एक खास जगह पर जाए। अमित वहाँ पहुंचता
है, लेकिन वहाँ एक छोटा सा लड़का उसे बुलाता है।
वह उसके साथ जाता है और उसके पीछे एक बंदूक के निश
ाने में पाया जाता है।
उस दिन रात को एक खूनी घटना होती है। अमित के दोस्
त राजेश के एक रिश्तेदार को गोली मार दी जाती है।
अमित के पास उसके बारे में जानकारी होती है, लेकिन
वह चुप रहता है। उसके पिता उसे घर बुलाते हैं, ले
किन अमित अपने दोस्त के बारे में सोचता रहता है।
एक दिन अमित राजेश के घर जाता है। वहाँ एक बैठक हो
रही है, जिसमें लोग एक नए राजनीतिक चरण की तैयारी
कर रहे हैं। अमित वहाँ घुस जाता है और एक निर्णय
लेता है। वह अपने दोस्त के खिलाफ बोलता है।
राजेश उसे घर से बाहर कर देता है। अमित अपने गांव
लौट जाता है, लेकिन वहाँ भी एक खूनी घटना होती है।
उसके दादाजी के घर में एक लड़का उसे बुलाता है, ज
ो उसके दोस्त राजेश का भाई है। अमित उसके साथ जाता
है और वहाँ एक छोटा सा लड़का उसे बुलाता है।
उस दिन अमित अपने दोस्त के बारे में सब कुछ जान जा
ता है। वह उसके खिलाफ बोलता है और अपने गांव के लो
गों के सामने उसके अपराध का खुलासा करता है। वहाँ
एक बड़ा झगड़ा हो जाता है, लेकिन अमित अपने दोस्त
के बारे में सच बोलता है।
अमित अपने गांव में रहता है, लेकिन वह अपने दोस्त
के बारे में सोचता रहता है। उसके पिता उसे बताते ह
ैं कि भारत आजाद हो गया है, लेकिन उसके दिल में अभ
ी भी एक खूनी घटना की याद है।


