गाँव का बुद्धिमान चंद्रमूर्ति अपने गाँव के लोगों
के बीच जाति के घाव झेलता है। उसके पिता के खाली
घर में एक फिल्म कलाकार के रूप में रहने का अवसर म
िलता है। वह शहर जाता है और एक छोटे फिल्म निर्माण
कार्यक्रम में शामिल हो जाता है।
ग्रामीण जीवन के दबाव के बीच वह अपने गाँव के विरो
ध के साथ फिल्म उद्योग में खड़ा हो जाता है। एक रा
त उसे एक अजीब फिल्म के टेप दिखाए जाते हैं जिसमें
उसके गाँव के लोग भाग लेते हैं। वह इसे गाँव के ल
ोगों के बीच रखने का फैसला करता है।
फिल्म की बाजार में चल रही असली घटनाओं के बीच चंद
्रमूर्ति अपने गाँव के लोगों की बात बताता है। एक
रात उसके घर में एक अजीब आग लग जाती है जिसमें उसक
े पिता के खाली घर के बाहर के चित्र जल जाते हैं।
उसे एहसास होता है कि उसके गाँव के लोग उसकी फिल्म
के बारे में जानते हैं।
एक दिन उसे एक फिल्म के निर्माण कार्यक्रम में बुल
ाया जाता है जहाँ उसके गाँव के लोग भाग लेते हैं।
वह अपने गाँव के लोगों के साथ फिल्म में अपने जीवन
की कहानी बताता है। उसकी फिल्म गाँव में दिखाई जा
ती है और उसके गाँव के लोग उसके बारे में जानते है
ं।
चंद्रमूर्ति की फिल्म उसके गाँव में एक नई जागरूकत
ा लाती है। वह अपने गाँव के लोगों के बीच अपनी बुद
्धि और सपनों के साथ खड़ा हो जाता है।


