साल 1942, लाहौर। एक छोटा घर, एक चारदीवारी वाला घ
र। एक आदर्श बहू, जिसका नाम राजेश्वरी है, अपने पत
ि के साथ एक नए शहर में आती है। वह एक बेटी के जन्
म के बाद अपने परिवार के बीच अपनी जगह बनाने की को
शिश करती है, लेकिन जब उसके पति की एक दूसरी बीवी
की खबर होती है, तो वह अपने विश्वास में झटका खाती
है।
उसके पिता, जो एक अंग्रेजी शिक्षित व्यक्ति है, उस
े अपने विचारों के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर
ते हैं। राजेश्वरी को एक धार्मिक यात्रा के बारे म
ें पता चलता है, जो उसे अपने जीवन के अंतर को समझन
े में मदद कर सकता है। वह एक दूरदर्शी आदमी के साथ
यात्रा करती है, जिसके बारे में उसे कुछ भी नहीं
पता।
यात्रा के दौरान, वह एक ऐसे स्थान पहुंचती है जहां
विभाजन के दौरान एक नई दुनिया बन रही है। वहां उस
े एक नए नियम के सामने आना पड़ता है: विवाह के बाद
अपने पति के नाम पर नाम बदलना अनिवार्य है। राजेश
्वरी इस नियम से डर जाती है, लेकिन वह अपने जीवन क
े लिए इसका सामना करती है।
उसके बाद एक घटना होती है जिसमें वह अपने पति के स
ाथ एक बातचीत करती है। वह अपने विचारों को बाहर नि
कालती है, लेकिन उसके पति उसे अपने नाम के बारे मे
ं एक बात बताते हैं जो उसे निराश कर देती है। वह अ
पने जीवन के लिए एक निर्णय लेती है, जो उसके अंतर
को अंततः समाप्त कर देता है।
अंत में, वह एक नए नाम से जानी जाती है। उसके पति
उसके नए नाम के साथ एक नए जीवन की शुरुआत करते हैं
। वह अपने बच्चों के साथ एक नए घर में रहती है, जह
ां उसके विचार अब अधिक स्वतंत्र हैं।


