1947 के बाद के शहर में, नई दिल्ली के एक छोटे घर

में एक संघर्षरत लेखक अपने लेख लिख रहा है। उसका न

ाम अमित है। वह एक छोटे स्टार्टअप की गाथा लिख रहा

है, जिसमें एक युवा क्रिकेट खिलाड़ी और एक चिकित्

सक के बीच एक रोमांस है। अमित के पिता एक ब्रिटिश

वकील थे, और उनकी माँ एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी

थीं। इस वजह से उसके जीवन में एक गहरा विरोध छिपा

हुआ है।

उसके बाबूजी के घर में एक बड़ा टीवी लगा हुआ है, ज

ो 1970 के दशक की आधुनिकता के चिह्न हैं। अमित के

बाबूजी एक व्यवस्था विवाह में फंसे हुए हैं, और उन

के बेटे अमित के लिए एक संयुक्त परिवार के अंतिम द

िनों के विरोध का प्रतीक हैं। अमित के पास एक छोटा

सा टॉस्ट है, जिसमें उसका क्रिकेट प्रेम और उसकी

राजनीतिक चिंता मिले हुए हैं।

एक दिन, अमित अपने टॉस्ट के साथ एक बड़े शहर के एक

क्रिकेट मैदान में जाता है, जहाँ वह एक छोटे स्टा

र्टअप की गाथा के लिए अपने विचारों को अभिव्यक्त क

रता है। उसका क्रिकेट खिलाड़ी एक एनआरआई है, जो अप

ने भारतीय मूल के कारण अपने देश के विभाजन के घाव

को भूल नहीं सकता। अमित उसे अपनी लेखन शैली में शा

मिल करता है, जिसमें जाति संघर्ष और रेट्रो प्रेम

के बीच एक गहरा विरोध है।

एक दिन, अमित के बाबूजी उसके लेख को पढ़ते हैं, और

वे उसे अपने विचारों के विरोध में देखते हैं। उनक

े घर में एक नियम है: कोई भी विचार जो उनके परिवार

के धार्मिक या सामाजिक मूल्यों के विरोध में हो,

वह अस्वीकृत हो जाता है। अमित इस नियम के खिलाफ लड

़ता है, और अपने लेख को अपने अंतिम टॉस्ट के साथ प

्रकाशित करता है।

उसका लेख एक बड़ा विवाद बन जाता है, और उसका टॉस्ट

एक चर्चा का केंद्र बिंदु बन जाता है। अमित क्रोध

ित हो जाता है, लेकिन उसका लेख अपनी गाथा के साथ अ

पने विचारों के साथ एक सफलता बन जाता है। अंत में,

अमित अपने लेख के बाद एक नई शुरुआत करता है, जिसम

ें उसका क्रिकेट प्रेम और उसका विरोध एक बार फिर श

ामिल हो जाता है।