गांव के छोटे से घर में रहने वाला विद्रोही युवक अ
पने दादाजी के नौकर के बेटे के साथ घूमता रहता है।
एक दिन वह अपने बाप के निश्चित विवाह के बारे में
जान जाता है — एक दूसरे गांव की लड़की के साथ। उस
के मन में अजीब सा भय उठता है, जैसे उसके जीवन का
एक बड़ा हिस्सा छीन लिया गया हो।
गांव में अब बिजली आ गई है, और दूरदर्शन चल रहा है
। युवक के दोस्त इसके बारे में बात करते हैं, जबकि
उसके पिता कहते हैं कि यह सब बर्बरता है। युवक के
दिमाग में एक विचार घुस जाता है: अगर वह अपने जीव
न के निर्णय खुद ले ले तो क्या होगा?
एक रात वह गांव के बाहर निकल जाता है, जहां एक नए
रास्ते के बारे में सुनता है। वह एक शहर के लड़के
के साथ मिल जाता है, जो अपनी बहन के लिए एक विवाह
के खिलाफ खड़ा है। दोनों एक दूसरे के दुख को समझते
हैं, और एक छोटा सा रास्ता ढूंढते हैं जहां वे अप
ने जीवन के अपने निर्णय ले सकते हैं।
गांव में विवाह की तैयारी चल रही है, लेकिन युवक क
े पास एक नई जानकारी है। वह अपने बाप के सामने खड़
ा हो जाता है और बोलता है कि वह विवाह नहीं करेगा।
उसके बाप के चेहरे पर रोष फैल जाता है, लेकिन युव
क के आंखों में एक नया आशा का दम जल रहा है।
अगले दिन गांव में खबर फैल जाती है कि एक युवक ने
विवाह के खिलाफ खड़ा हो जाया। लोग चर्चा करते हैं,
कुछ हंसते हैं, कुछ डरते हैं। लेकिन युवक अपने रा
स्ते पर खड़ा है, जैसे एक नए दिन की शुरुआत हो रही
हो।


