टेक उद्यमी राजेश ने 1970 के दशक में एक छोटे शहर
में बैंक खाता खोला। उसके बाद वह अपने छोटे भाई के
साथ डिजिटल ट्रांजैक्शन के नए तरीके ढूंढता रहा।
उसकी आगे बढ़ती तकनीक ने उसे एक बड़े बैंक के ध्या
न में ला दिया।
राजेश के गृहनगर में रेट्रो समय की लहर चल रही थी।
दूरदर्शन के खबरों में अक्सर अफगानिस्तान और चीन
की बात होती थी। लेकिन राजेश के लिए सबसे बड़ा खतर
ा उसके गांव में एक नए विपक्ष के उभरने के बाद शुर
ू हुआ।
उसके एक रिश्तेदार ने एक चेतावनी दी: "अब तुम्हारी
तकनीक लोगों के लिए खतरा बन गई है।" राजेश ने इसे
हल्के में लिया, लेकिन जब उसके छोटे भाई के बैंक
खाते में अजीब से ट्रांजैक्शन होने लगे, तो उसे अच
्छी तरह से समझ आ गया कि वह एक बड़े षड्यंत्र के ब
ीच में है।
उसके बाबू ने एक खास नियम बनाया था: "कभी भी अपने
परिवार के नाम पर जाने वाले धन को बदल नहीं सकते।"
लेकिन राजेश ने अपने छोटे भाई के बैंक खाते में ए
क ऐसा ट्रांजैक्शन कर दिया जिसे राजनीतिक रूप से अ
पराध माना गया।
इसके बाद राजेश के गांव में एक बड़ा झगड़ा शुरू हो
गया। उसके बाबू ने उसे घर से बाहर कर दिया। लेकिन
राजेश ने अपने छोटे भाई के साथ एक नया तरीका ढूंढ
ा, जिसमें वह अपने परिवार के सम्मान को बरकरार रख
सके।
अंत में राजेश ने एक नए टेक बैंकिंग सिस्टम की शुर
ुआत की, जिसमें लोगों के परिवार के नाम पर ट्रांजै
क्शन हो सके। उसके बाबू ने अंत में उसके बारे में
जानकारी ली और उसके नए उद्यम को स्वीकार कर लिया।


