1975 के आपातकाल के बाद, एक छोटे दुकानदार राजेश अ

पने पिता की छोटी दुकान के बाहर बैठा रहता है। उसक

े हाथों में एक टेप रिकॉर्डर है, जो उसकी एकमात्र

बचत है। दुकान के पास एक बड़ा विदेशी निवेशक आता ह

ै, जो उसके यहां फैशन के नए आइटम ले आता है। इसके

साथ उसकी दुकान के लिए एक नई दुनिया खुलती है।

एक नियम होता है: दुकान के अंदर अंग्रेजी बोलना नि

षिद्ध है। राजेश के पिता ने इसे अपनी छोटी दुकान क

े लिए एक सुरक्षा बना रखा है। लेकिन जब विदेशी निव

ेशक उस नियम को तोड़ता है, तो राजेश के पिता बुरी

तरह चिंतित हो जाते हैं।

राजेश अपने टेप रिकॉर्डर में एक छोटी रिकॉर्डिंग ब

नाता है, जिसमें वह अपने पिता की बातें लिखता है।

इसके बाद वह एक अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड के साथ एक स

ंघ करता है, जिसमें उसकी दुकान बड़े शहरों में फैल

ती है।

एक दिन, राजेश अपने पिता के घर आता है, और देखता ह

ै कि वह अपनी छोटी दुकान के बंद होने के बाद एक बै

ठक में बैठे हैं। राजेश उनके सामने अपनी टेप रिकॉर

्डिंग बजाता है, जिसमें वह अपने पिता की बातें लिख

ता है। उसके पिता रोते हैं, और राजेश को अपनी दुका

न के बंद होने के बाद अपने पिता के साथ रहने के लि

ए कहते हैं।

उसकी दुकान बंद हो जाती है, लेकिन उसकी टेप रिकॉर्

डिंग एक नई दुनिया के लिए बीज बोती है। वह अपने बच

े हुए सपनों के लिए एक नई शुरुआत करता है — अपने द

ेश के लिए एक छोटा सा अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड।