1930 के दशक में बरहानपुर, एक छोटे शहर में गांधीव

ाद के झंडे फहराए जा रहे थे, लेकिन वास्तविकता में

अमीरों के हाथ में शक्ति थी। एक भ्रष्ट नेता, राम

चंद्र शर्मा, अपने चुनाव अभियान में देशभक्ति के झ

ूठे झंडे लहराता रहता है, लेकिन अपने घर में एक अं

ग्रेजी शिक्षित लड़की के साथ एक विवाह के तौर पर ए

क दूसरे देश के साथ अपने जीवन के बारे में लड़ रहा

है।

उसकी बहन, ललिता, एक स्वतंत्रता संग्राम की नायिका

है, जो एक दिन अपने भाई के गलत चुनाव के खिलाफ उठ

ती है। उसके पास एक छोटा प्रेस वाला कमरा है, जहाँ

वह अपनी आत्मखोज के लिए एक संयुक्त परिवार के बीच

जीवन के तमाम झूठों के बारे में लिखती है।

एक दिन, एक क्रिकेट मैच में एक छोटा देशभक्ति जुम्

बा आयोजित किया जाता है, जहाँ रामचंद्र अपनी जाति

के लोगों को एकता के नाम पर झूठे वादे करता है। ले

किन उसकी बहन उसके बारे में एक खुला अखबार लेकर आत

ी है, जिसमें उसके द्वारा देश के खिलाफ एक निजी चा

ल के बारे में खुलासा किया गया है।

रामचंद्र के दिल में एक आत्मखोज के बीच एक लाल गर्

व और एक नीला लालच खड़े हो जाते हैं। उसके पास एक

नियम है: अपने चुनाव के बाद एक दिन वह अपने देश के

लिए जी जाएगा — या फिर एक विवाह के बाद अपने अंग्

रेजी पति के बारे में खुद को छोड़ देगा।

एक निर्णय लेने के बाद वह अपने देश के लिए एक नई ज

ीत के रूप में उठता है, लेकिन इस बार उसका अपना हृ

दय अपने अंतर्निहित लाल चाल के बारे में खुला हो ज

ाता है। वह एक नए जीवन के लिए तैयार हो जाता है, ल

ेकिन अपने भीतर के देशभक्ति के झूठे झंडे के बारे

में अब वह कभी नहीं झूठ बोल सकता।