1942 में उत्तर भारत के एक छोटे गांव में, बच्चन स
िंह अपने आप को घरेलू नौकर के रूप में बराबरी से द
ेखता है। वह अपने मालिक के घर में रहता है, जो एक
गांव के अमीर थे, लेकिन उनके गृह स्वामी ने उसे अप
ने बेटे के साथ बराबरी के साथ रखा।
गांव में एक पुराना मंदिर है, जिसे लोग भूत के घर
के रूप में डरते हैं। बच्चन सिंह को अक्सर रात में
वहां जाना पड़ता है, जब गांव के लोग खाली हो जाते
हैं। एक रात वह वहां एक छोटे बॉक्स के साथ वापस आ
ता है, जिसमें एक खून के धब्बे वाला कागज होता है।
अगले दिन, गांव के लोग बच्चन सिंह के घर में घुस ज
ाते हैं। उनके अफसर उसे जाति के कारण बर्बरता के श
िकार करते हैं। बच्चन सिंह को अपने घर से बाहर कर
दिया जाता है, और उसे गांव के बाहर रहने की आज्ञा
दी जाती है।
उसके बाद, बच्चन सिंह अपने छोटे बॉक्स के साथ एक श
हर में जाता है। वहां वह एक छोटे बाजार में रहता ह
ै, जहां वह अपने रहस्य के बारे में खोजता है। उसके
पास एक खून के धब्बे वाला कागज है, जिसमें एक लेख
है जो गांव के अमीर के खिलाफ लिखा गया है।
एक दिन, बच्चन सिंह एक लेखक के पास जाता है, जो उस
के खून के धब्बे के कागज को देखता है। लेखक उसे बत
ाता है कि वह गांव के अमीर के बेटे के खिलाफ लिखा
गया है, जो एक बच्चे के साथ अत्याचार करता था।
बच्चन सिंह अपने छोटे बॉक्स के साथ फिर गांव में ज
ाता है। वह अपने पुराने घर के बाहर खड़ा हो जाता ह
ै, और अपने छोटे बॉक्स को खोलता है। उसमें एक छोटा
बॉक्स है, जिसमें एक छोटा पत्र है। वह उस पत्र को
पढ़ता है और अपने जीवन के बारे में जान जाता है।
गांव के लोग उसे फिर से बर्बरता के शिकार करते हैं
। लेकिन बच्चन सिंह अब अपने जीवन के बारे में जानत
ा है। वह अपने जीवन के बारे में अपने आप को बर्बरत
ा से बचाता है।
एक रात, बच्चन सिंह गांव के मंदिर में जाता है। वह
अपने छोटे बॉक्स को खोलता है और उसमें से एक छोटा
पत्र निकालता है। वह उस पत्र को पढ़ता है और अपने
जीवन के बारे में जान जाता है।
गांव के लोग उसे फिर से बर्बरता के शिकार करते हैं
, लेकिन बच्चन सिंह अब अपने जीवन के बारे में जानत
ा है। वह अपने जीवन के बारे में अपने आप को बर्बरत
ा से बचाता है।
अंत में, बच्चन सिंह अपने छोटे बॉक्स के साथ एक नए
शहर में जाता है, जहां वह अपने जीवन के बारे में
अपने आप को बर्बरता से बचाता है।


