1943 के शहर में एक छोटा दुकानदार अपने घर के बाहर

रहता है। उसकी दुकान एक छोटे बाजार में है, जहां

गांधीजी के आंदोलन की धून अभी तक चल रही है। लेकिन

जब एक बार एक अफसर दुकान में घुस जाता है और उसे

बिना कागज के नियमों के तहत गिरफ्तार कर लेता है,

तो उसके जीवन का आधार ढह जाता है।

उसके पास एक छोटा सा रजिस्टर है जिसमें वह अपने ग्

राहकों के नाम लिखता है, लेकिन अब उसे इस रजिस्टर

को एक नया रूप देना पड़ता है। जब वह अपने दुकानदार

ी के रिकॉर्ड को एक नए तरीके से रखने की कोशिश करत

ा है, तो उसकी नई व्यवस्था अफसरों के ध्यान में आ

जाती है।

अफसर उसे अपने दफ्तर में बुलाता है और उसे बताता ह

ै कि अब उसकी दुकान के लिए एक नया रजिस्टर बनाना अ

निवार्य है, जिसमें ग्राहकों के नाम, पते और खरीदा

री के डेटा का रिकॉर्ड होगा। उसे इस नए रजिस्टर के

लिए एक नया फॉर्म भरना होगा, जिसमें उसके घर का प

ता भी शामिल होगा।

उसकी दुकान अब एक नए तरीके से देखी जाने लगती है।

ग्राहक अब अपने नाम लिखाने के बजाय एक छोटा सा फॉर

्म भरते हैं। उसके पास अब एक नया रजिस्टर है, जिसम

ें लोगों के नाम और उनके बारे में जानकारी है, लेक

िन वह अब अपनी दुकान के बारे में अधिक जानता है।

एक दिन वह अपने रजिस्टर के एक पृष्ठ को देखता है,

जिसमें उसके अपने नाम के साथ एक नया नाम भी है। वह

अपने नाम के बारे में जानता है, लेकिन इस नए नाम

के बारे में कुछ नहीं जानता। उसे इस नए नाम के बार

े में पूछना होता है, लेकिन अब वह इसके लिए एक नया

रजिस्टर बना रहा है।

उसकी दुकान अब एक नए तरीके से चल रही है। ग्राहक अ

ब अपने नाम लिखाने के बजाय एक छोटा सा फॉर्म भरते

हैं। उसके पास अब एक नया रजिस्टर है, जिसमें लोगों

के नाम और उनके बारे में जानकारी है, लेकिन वह अब

अपनी दुकान के बारे में अधिक जानता है।

उसकी दुकान अब एक नए तरीके से चल रही है। ग्राहक अ

ब अपने नाम लिखाने के बजाय एक छोटा सा फॉर्म भरते

हैं। उसके पास अब एक नया रजिस्टर है, जिसमें लोगों

के नाम और उनके बारे में जानकारी है, लेकिन वह अब

अपनी दुकान के बारे में अधिक जानता है।