1946 के गर्म गुरुवार को, एक गांव में चार बच्चों

की माँ बनी लक्ष्मी अपने नए घर में रहने लगती है।

उसका पति, एक छोटा अफसर, दिल्ली में काम करता है।

लक्ष्मी को अपने नए परिवार में समायोजित होने में

दिक्कत होती है, लेकिन वह अपने सासससुर के धर्म के

अनुसार रहती है।

1947 के मई में, गांव में बंटवारा के खबर आते हैं।

लक्ष्मी के पति के दोस्त, जो एक अंग्रेजी स्कूल क

े शिक्षक हैं, गांव में एक नए विचार के साथ आते है

ं। वे कहते हैं कि अब देश बंट जाएगा और लोग अपने ध

र्म के आधार पर जाएंगे। लक्ष्मी के पिता, जो एक व्

यापारी हैं, अपने बच्चों को ले जाने का फैसला करते

हैं।

लक्ष्मी के पति को इस बात का पता चलता है कि उनके

घर में एक मुस्लिम नौकर है। वह उसे बर्खास्त कर दे

ता है। लक्ष्मी उस नौकर के साथ बात करती है और उसे

अपने घर में रखने की अपील करती है। वह अपने पति क

े खिलाफ खड़ा हो जाती है।

1947 के जून में, गांव में एक झगड़ा होता है। लक्ष

्मी के पिता अपने बच्चों के साथ चले जाते हैं। लक्

ष्मी अपने पति के साथ रहती है, लेकिन उसके घर में

एक बर्बर ताकत आ जाती है। उसके पति ने उसे अपने बा

रे में अपने बारे में नहीं बताया था कि वह एक गांध

ीवादी है। वह अपने घर में एक अंग्रेजी अखबार पढ़ता

है।

लक्ष्मी अपने घर में एक नए विचार के साथ रहती है।

वह अपने पति के साथ बात करती है और उसे बताती है क

ि वह अपने बच्चों के साथ जाएगी। उसके पति उसकी बात

मान लेता है। लेकिन वह अपने बच्चों के साथ जाने क

े बजाय अपने घर में रहता है।

1947 के अगस्त में, लक्ष्मी अपने बच्चों के साथ एक

नए गांव में रहने लगती है। वह अपने घर में एक नए

विचार के साथ रहती है। वह अपने बच्चों के साथ एक न

ए जीवन की शुरुआत करती है।