साल 1943, मुंबई के गलीगली चलने वाले आदमी बदल गए।

शहर के नीचे छिपे अपराध के जाल में एक रूढ़िवादी

दादी की खूबसूरत लेखनी फंस जाती है। वह अपने घर के

बाहर जाने वाली नहीं, लेकिन अपने बेटे के नाम पर

लिखती है। उसके लेखन को एक अजीब बंदूकधारी देखता ह

ै, जो अपने घर में बैठे अपनी बेटी के लिए लिख रही

है।

एक दिन उसके घर में एक अजीब लड़का आता है, जो एक ग

ांधीवादी जैसा लगता है, लेकिन उसके हाथ में एक खून

ी चाबी होती है। वह दादी के घर के नीचे छिपे एक छे

द के बारे में बताता है, जहां अपराधी अपने बच्चों

को छुपा लेते हैं। दादी उसकी बात सुनकर डर जाती है

, लेकिन वह अपने बेटे के लिए लिखती है, जो इस जाल

में फंस जाएगा।

एक रात दादी अपने घर के नीचे जाती है, जहां एक बच्

चा छुपा हुआ है। वह उसे अपने घर ले जाती है, लेकिन

अगले दिन उसके घर में एक अजीब आदमी आता है, जो उस

े बंद कर देता है। वह अपने बेटे के लिए लिखती है,

जो उसके घर में छुपा हुआ है, लेकिन उसके बेटे के ल

िए लिखने के बजाय वह अपने घर में एक बच्चे के बारे

में लिखती है, जो उसके घर में छुपा हुआ है।

अंत में दादी के लेखन को एक जांच अधिकारी खोज लेता

है, जो उसके घर में एक बच्चा छुपा हुआ पाता है। व

ह उसे बचा लेता है, लेकिन दादी के लेखन के कारण उस

के घर में एक अजीब आदमी आ जाता है, जो उसे बंद कर

देता है। दादी के लेखन को एक नया लेखक खोज लेता है

, जो उसके बेटे के बारे में लिखता है, जो उसके घर

में छुपा हुआ है।