मुंबई में एक छोटा सा कार्यालय, एक चौथे तले के फ्

लैट में रहने वाला विदेश लौटा एनआरआई अपने पुराने

दिनों के सपने देखता है। उसकी आंखों में वही छाया

है जो उसके पिता के दिनों में थी – नई तकनीक के सा

मने लुढ़कती हुई जीवनशैली।

उसके घर में एक छोटा सा डिजिटल बैंक है, जिसे उसने

अपने विदेशी जीवन के एक उपहार के रूप में खरीदा थ

ा। लेकिन एक दिन वह अपने खाते में एक अजीब राशि दे

खता है – जो उसके घर के बैंक खाते से आई है। उसकी

आंखें बराबर घूमती हैं, जैसे कोई अंधेरे में घुस ग

या हो।

अगले दिन उसके घर के दरवाजे पर एक छोटा सा पत्र आत

ा है – जिसमें लिखा है: "आपकी डिजिटल जानकारी एक ब

ाहरी स्रोत तक पहुंच गई है। अब आपके भविष्य की जिम

्मेदारी आपके हाथ में है।" उसके हाथ ठंडे हो जाते

हैं। वह अपने डिजिटल बैंक के ऑपरेशन के बारे में ज

ानकारी देखता है, जो उसके द्वारा नहीं देखी गई थी।

उसके पास एक ऐसा टूल है जो उसके घर के डिजिटल सिस्

टम को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे अ

पने पुराने दिनों की जानकारी का इस्तेमाल करना होग

ा। वह अपने पिता के दिनों की दस्तावेजों में गहराई

से खोजता है, जो उसके घर में एक छोटे से बॉक्स मे

ं रखे हुए हैं। उसके हाथ एक पुराना चिट्ठा पकड़ ले

ते हैं – जिसमें लिखा है: "इस बैंक के सभी खाते एक

दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर आप एक को खोल देंगे,

तो दूसरे खाते भी खुल जाएंगे।"

उसके हाथ छुपे हुए दरवाजे के ऊपर जाते हैं, जो उसक

े पिता के दिनों में बंद रहे हैं। जब वह उसे खोलता

है, तो वहां एक पुराना फाइल कब्बारा है, जिसमें ए

क छोटा सा डिस्क है। वह उसे अपने डिजिटल बैंक में

डालता है, और एक नई जानकारी उसके सामने आती है – ज

ो उसके पिता के दिनों में रखी गई थी।

उसके पास एक अंतिम चुनाव है: अपने डिजिटल बैंक को

बंद कर देना या उसके सभी खाते खोल देना। वह अपने प

ुराने दिनों के बारे में सोचता है – जब उसके पिता

ने अपने दिनों के एक विश्वास के साथ जीवन बिताया थ

ा। अंत में वह डिजिटल बैंक को बंद कर देता है, और

अपने पुराने जीवन की ओर लौट जाता है।