एक आईएसएस में नौकरी करने वाला पुरुष अपने बेटे के

लिए भारतअमेरिका संबंधों के एक नए राजदूत के रूप

में नियुक्त हो जाता है। वह अपने गृहनगर वापस आता

है और अपने बेटे के जीवन में एक अजीब घटना देखता ह

ै: बेटा अपने दोस्त के साथ एक छात्र आंदोलन में शा

मिल हो जाता है जो अंतर्राष्ट्रीय नीतियों पर बहस

करता है।

बेटे के व्यवहार के बारे में जानकारी मिलती है, जि

समें उसकी अंतरराष्ट्रीय जानकारी और विचार अपने पि

ता के रूढ़िवादी दृष्टिकोण के खिलाफ होते हैं। बेट

ा अपने पिता के साथ एक आंतरिक टकराव में फंस जाता

है, जब वह एक अमेरिकी विद्यार्थी के साथ अपने आत्म

भाव के बारे में बात करता है।

एक दिन, पुरुष अपने बेटे को घर में अकेला पाता है,

जब वह एक बैठक में शामिल हो रहा है जिसमें उसके द

ोस्त और एक अमेरिकी विद्यार्थी अपने आत्मभाव के बा

रे में बात कर रहे हैं। बेटा अपने पिता के सामने ए

क अंतरराष्ट्रीय विचार के साथ खड़ा हो जाता है, जो

उसके पिता के लिए अपमानजनक होता है।

उस रात, पुरुष अपने बेटे के साथ एक बातचीत में लग

जाता है, जिसमें वह अपने बेटे के विचारों को बर्बर

ता से खारिज करता है। बेटा अपने आप को एक अंतरराष्

ट्रीय व्यक्ति के रूप में स्वीकार कर लेता है, जबक

ि उसके पिता अपने रूढ़िवादी विचारों के लिए खड़ा र

हता है।

एक दिन, पुरुष के अमेरिकी अधिकारी के साथ एक विशेष

बैठक होती है, जिसमें उसके बेटे के आंदोलन के बार

े में बात होती है। बेटा अपने पिता के सामने एक अं

तरराष्ट्रीय विचार के साथ खड़ा हो जाता है, जो उसक

े पिता के लिए अपमानजनक होता है।

उस रात, पुरुष अपने बेटे के साथ एक बातचीत में लग

जाता है, जिसमें वह अपने बेटे के विचारों को बर्बर

ता से खारिज करता है। बेटा अपने आप को एक अंतरराष्

ट्रीय व्यक्ति के रूप में स्वीकार कर लेता है, जबक

ि उसके पिता अपने रूढ़िवादी विचारों के लिए खड़ा र

हता है।

एक दिन, पुरुष के अमेरिकी अधिकारी के साथ एक विशेष

बैठक होती है, जिसमें उसके बेटे के आंदोलन के बार

े में बात होती है।