1947 के बाद के प्रलयोत्तर भारत में, छोटे शहर के

एक फिल्म निर्देशक अमित राय अपने प्रेम विवाह के ब

ाद एक छोटे से बॉक्स ऑफिस के बाजार में अपनी फिल्म

के लिए लड़ रहे हैं। उनकी फिल्म, एक विश्वासघात क

ी कहानी, उनकी पत्नी अमृता के साथ एक संयुक्त परिव

ार के बीच गुप्त रूप से बन रही है। अमृता, एक महिल

ा, जो अपने बचपन के सपनों के बारे में बात करती रह

ती है, अब अपने पति के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने

के लिए एक व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता में फंस गई ह

ै।

अमित और अमृता के बीच एक अस्पष्ट डर छाया हुआ है—उ

नके घर में एक पुराने घर के दरवाजे पर लिखे एक गुप

्त चिन्ह के बारे में जो एक अजीब ताना बांध रहा है

। अमित के एक पुराने दोस्त, जो एक अपराधी था, अब ए

क व्यापारी बन गया है, और अमित की फिल्म के लिए उस

के पास एक अनैतिक वित्तीय सहायता देने के लिए आया

है।

अमृता के अपने छोटे भाई ने एक डरावना घटना के बारे

में बताया कि उनके घर में रात में कोई अजनबी आया

था और उसने एक गुप्त छाप छोड़ दी थी। अमित को इस ड

र के बीच अपनी फिल्म बनाने के लिए झूठ बोलना पड़ा,

जो उनके अपने दिल के बीच एक बड़ा घाव छोड़ गया।

अमित की फिल्म की रिलीज के दिन, अमृता ने उसे एक ग

ुप्त चिन्ह के साथ एक नोट दिया, जो उनके घर के दरव

ाजे पर एक बार लिखा गया था। उस नोट में लिखा था: "

वापस आओ, तुम्हारा दिल मेरे घर में है।" अमित ने उ

स नोट को अपने हाथ में लिए बाहर निकला और अमृता के

बारे में एक नई बात सीखी—उनके बीच जो विश्वास था,

वह अब एक अजीब ताना बांध रहा था, जो उनके घर के ब

ीच एक डरावने भावना के बीच बैठा हुआ था।

अमित ने अपनी फिल्म के बारे में एक नई अंतिम लेखन

लिखा, जिसमें उनकी अमृता के बारे में एक नई बात बत

ाई गई थी—एक असली विश्वास के बारे में, जो एक डराव

ने दुनिया में एक असली दिल के रूप में रहा।